जब भी क्रिकेट के मैदान पर मास्टर ब्लास्टर Sachin Tendulkar का नाम लिया जाता है, तो फैंस के दिमाग में उनके 100 शतक, 34 हजार से ज्यादा इंटरनेशनल रन और स्ट्रेट ड्राइव की तस्वीरें घूमने लगती हैं। दुनिया उन्हें ‘गॉड ऑफ बैटिंग’ (God of Batting) के नाम से पूजती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी बल्लेबाज के नाम वनडे क्रिकेट (ODI) का एक ऐसा जादुई गेंदबाजी रिकॉर्ड भी दर्ज है, जिसे हासिल करने के लिए दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गज गेंदबाज तरस गए?
जी हां, क्रिकेट इतिहास के सबसे महान लेग स्पिनर शेन वॉर्न, पाकिस्तान के महान ऑलराउंडर इमरान खान और साउथ अफ्रीका के सबसे घातक तेज गेंदबाज डेल स्टेन जैसे विशुद्ध गेंदबाजों के पास भी वनडे क्रिकेट में वो रिकॉर्ड नहीं है, जो सचिन तेंदुलकर ने अपने नाम कर रखा है। आइए जानते हैं सचिन तेंदुलकर के उस अनसुने और हैरान कर देने वाले कारनामे के बारे में, जिसने बड़े-बड़े दिग्गजों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
बैटिंग के ‘भगवान’ का बॉलिंग अवतार
सचिन तेंदुलकर केवल एक महान बल्लेबाज नहीं थे, बल्कि वह कप्तान के लिए एक ‘संकटमोचक’ गेंदबाज भी थे। जब भी टीम इंडिया को किसी साझेदारी को तोड़ने की जरूरत होती थी, कप्तान की नजरें सचिन पर टिक जाती थीं। सचिन के पास एक अनोखी कला थी—वह एक ही मैच में बिना किसी परेशानी के मीडियम पेस (तेज गेंदबाजी), ऑफ-स्पिन और लेग-स्पिन तीनों तरह की गेंदबाजी कर सकते थे। उनकी इसी जादुई गेंदबाजी ने उन्हें वनडे इतिहास का एक अनोखा रिकॉर्ड दिला दिया।
यह रिकॉर्ड है वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में ‘दो या दो से अधिक बार एक मैच में 5 विकेट हॉल’ (5-wicket hauls) लेने का। आपको जानकर अविश्वसनीय लगेगा कि सचिन तेंदुलकर ने अपने वनडे करियर में 2 बार एक मैच में 5 या उससे ज्यादा विकेट चटकाए हैं।
अगर हम क्रिकेट इतिहास के दिग्गज गेंदबाजों के आंकड़ों की तुलना सचिन से करें, तो असली कहानी सामने आती है। टेस्ट क्रिकेट में 708 विकेट लेने वाले दुनिया के सबसे महान स्पिनर शेन वॉर्न अपने पूरे वनडे करियर में सिर्फ 1 बार ही 5 विकेट लेने का कारनामा कर पाए। इसी तरह, पाकिस्तान के सबसे सफल कप्तानों और गेंदबाजों में शुमार इमरान खान और साउथ अफ्रीका के रफ्तार के राजा डेल स्टेन भी अपने पूरे वनडे करियर में केवल 1-1 बार ही फाइव-विकेट हॉल हासिल कर सके। जिन गेंदबाजों का खौफ बल्लेबाजों के दिलों में रहता था, सचिन तेंदुलकर ने पार्ट-टाइम गेंदबाजी करते हुए उनसे ज्यादा बार यह कारनामा अकेले कर दिखाया।
किस्सा 1: जब कोच्चि में कंगारुओं की बोलती बंद हुई (1998)
सचिन तेंदुलकर ने अपना पहला 5 विकेट हॉल 1 अप्रैल 1998 को कोच्चि में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लिया था। पेप्सी त्रिकोणीय सीरीज के इस मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 309 रनों का विशाल स्कोर बनाया था। लक्ष्य का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया की टीम माइकल बेवन और डैरेन लेहमैन की बेहतरीन पारियों की बदौलत जीत की तरफ मजबूती से बढ़ रही थी।
इस मैच के आंकड़ों की बात करें, तो जब कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने गेंद सचिन तेंदुलकर को थमाई, तब ऑस्ट्रेलिया बेहद मजबूत स्थिति में था। लेकिन सचिन ने महज 10 ओवरों के स्पेल में सिर्फ 32 रन देकर ऑस्ट्रेलिया के 5 बड़े बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। सचिन ने उस मैच में माइकल बेवन, स्टीव वॉ, डैरेन लेहमैन, टॉम मूडी और डेमियन मार्टिन जैसे दिग्गजों के विकेट चटकाए, जिसकी बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 41 रनों से हरा दिया।

किस्सा 2: पाकिस्तान के खिलाफ फिर कोच्चि में मचाया तहलका (2005)
Sachin Tendulkar का कोच्चि के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से एक अलग ही रिश्ता था। 2 अप्रैल 2005 को भारत और पाकिस्तान के बीच कोच्चि में ही मैच खेला जा रहा था। भारत ने पहले खेलते हुए वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ के शतकों की बदौलत 281 रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान की टीम ने शुरुआती विकेट खोने के बाद कप्तान इंजमाम-उल-हक और अब्दुल रज्जाक के दम पर मैच में वापसी कर ली थी।
इस हाई-प्रेशर मुकाबले के आंकड़ों पर नजर डालें, तो सचिन तेंदुलकर ने एक बार फिर गेंद थामी और पाकिस्तानी बल्लेबाजी क्रम की रीढ़ तोड़ दी। उन्होंने अपने स्पेल में शानदार गेंदबाजी करते हुए 50 रन देकर 5 विकेट झटके। सचिन ने इस पारी में इंजमाम-उल-हक, अब्दुल रज्जाक, शाहिद अफरीदी, मोहम्मद सामी और मोहम्मद हफीज जैसे खतरनाक खिलाड़ियों का शिकार किया, जिससे पाकिस्तान की टीम बिखर गई और भारत यह मुकाबला 87 रनों से जीत गया।
आखिरी ओवरों के असली ‘जादूगर’
सचिन के खाते में केवल ये दो रिकॉर्ड ही नहीं हैं, बल्कि वह आखिरी ओवरों में मैच पलटने के लिए जाने जाते थे। 1993 के हीरो कप सेमीफाइनल को कोई कैसे भूल सकता है? साउथ अफ्रीका को आखिरी ओवर में जीत के लिए सिर्फ 6 रन चाहिए थे। कप्तान अजहरुद्दीन असमंजस में थे कि गेंद किसे दें क्योंकि मुख्य गेंदबाजों के ओवर खत्म हो चुके थे।
इस ऐतिहासिक ओवर के आंकड़े आज भी रोमांच पैदा करते हैं। सचिन तेंदुलकर ने खुद आगे बढ़कर कप्तान से गेंद ली। उन्होंने अपनी जादुई मध्यम गति की गेंदों से साउथ अफ्रीका के बल्लेबाजों को पूरी तरह बांध दिया। सचिन ने उस आखिरी ओवर में केवल 3 रन खर्च किए और एक बल्लेबाज को रन आउट भी करवाया। भारत ने इस सांस रोक देने वाले मैच को 2 रनों से जीतकर फाइनल में जगह बनाई थी।
कनक्लूजन
सचिन तेंदुलकर के नाम वनडे क्रिकेट में 154 विकेट दर्ज हैं, जो कई नियमित स्पिनरों और तेज गेंदबाजों से भी ज्यादा हैं। इसके साथ ही उन्होंने वनडे में शोएब अख्तर (7,764 गेंदें) से भी ज्यादा कुल गेंदें (8,054 गेंदें) फेंकी हैं। उनका यह रिकॉर्ड यह साबित करता है कि वह क्रिकेट इतिहास के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर्स में से एक थे, भले ही दुनिया ने उन्हें हमेशा एक बल्लेबाज के रूप में ज्यादा याद रखा। अगली बार जब कोई आपसे कहे कि सचिन सिर्फ बैटिंग के उस्ताद थे, तो उन्हें कोच्चि के ये दो ऐतिहासिक मैच और 5 विकेट हॉल का यह रिकॉर्ड जरूर याद दिला दीजिएगा।
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Gobin Sharma is a professional digital sports journalist and cricket analyst with over 3+ years of experience tracking international cricket and domestic leagues. Specializing in IPL tactical breakdowns, ICC tournament statistics, and real-time match reporting, he delivers accurate, fact-checked, and data-driven insights for avid cricket fans worldwide. For editorial inquiries or updates, reach out via Twitter or Email.
