Netherlands Women’s Team: क्रिकेट के मैदान पर जब कोई टीम पहली बार विश्व कप जैसे बड़े मंच पर कदम रखती है, तो उसके साथ करोड़ों उम्मीदें और बड़े सपने होते हैं। नीदरलैंड्स की महिला क्रिकेट टीम के लिए भी आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 का यह सफर कुछ ऐसा ही था। क्वालीफायर में यूएसए, स्कॉटलैंड और थाईलैंड जैसी टीमों को पटखनी देकर पहली बार वर्ल्ड कप का टिकट कटाने वाली नीदरलैंड्स टीम से उनके फैंस को बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन जब उनका सामना ग्रुप-1 की ‘दिग्गज’ टीमों से हुआ, तो अनुभव की कमी साफ नजर आई। नीदरलैंड्स की टीम बिना एक भी मैच जीते, यानी बिना खाता खोले ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई है।
‘ग्रुप ऑफ डेथ’ में फंसा ‘ऑरेंज आर्मी’ का रथ
Netherlands Women’s के लिए इस टूर्नामेंट की राह बेहद कठिन थी क्योंकि उन्हें ग्रुप-1 में रखा गया था, जिसे टूर्नामेंट का ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इस ग्रुप में भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी दुनिया की सबसे अनुभवी टीमें शामिल थीं। टूर्नामेंट के अपने शुरुआती मैच में ही बांग्लादेश ने डच टीम पर दबाव बना दिया, जिसके बाद मजबूत भारतीय महिला टीम और डिफेंडिंग चैंपियंस ऑस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड्स को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया।
भारत के खिलाफ स्मृति मंधाना के तूफानी प्रदर्शन के चलते टीम को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। वहीं दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए 24वें मैच में डच गेंदबाज पूरी तरह बेअसर दिखे, जहाँ अफ्रीकी ओपनर तज़मीन ब्रिट्स ने नाबाद 114 रनों की ऐतिहासिक शतकीय पारी खेल डाली। इस 210 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए नीदरलैंड्स की टीम केवल फीबे मोल्केनबोयर के 41 रनों की जुझारू पारी के बदौलत 120 रन ही बना सकी और यह मैच 88 रनों के भारी अंतर से हार गई।

पाकिस्तान के खिलाफ मैच: जब जीत की दहलीज पर आकर बिखर गई टीम
ओल्ड ट्रैफर्ड में पाकिस्तान के खिलाफ खेला गया मुकाबला नीदरलैंड्स के लिए अपना सम्मान बचाने और जीत का खाता खोलने का आखिरी और सबसे सुनहरा मौका था। इस मैच में डच गेंदबाजों ने अपनी सटीक लाइन-लेंथ से शानदार शुरुआत की और आइरिस ज़्विलिंग के बेहतरीन स्पेल (2-19) की बदौलत पाकिस्तान को महज 126 रनों पर ही रोक दिया।
लक्ष्य का पीछा करते हुए कप्तान बेबेट डी लीड के शानदार 30 रनों और हीदर सीगर्स के तेजतर्रार 24 रनों की बदौलत नीदरलैंड्स ने एक समय 3 विकेट पर 76 रन बना लिए थे और टीम जीत की दहलीज पर खड़ी नजर आ रही थी। लेकिन इसके बाद मैदान पर जो ड्रामा हुआ, उसने डच फैंस का दिल तोड़ दिया। पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना ने अपनी घातक गेंदबाजी (3-12) से ऐसा कहर बरपाया कि नीदरलैंड्स का मिडिल और लोअर ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह ढह गया। डच टीम ने महज 13 रनों के अंदर अपने आखिरी 7 विकेट गंवा दिए और पूरी टीम 89 रनों पर सिमट गई, जिसके चलते पाकिस्तान ने यह मुकाबला 37 रनों से जीत लिया।
हार से मिली सीख: एक नए सुनहरे युग की शुरुआत
भले ही Netherlands Women’s टीम इस वर्ल्ड कप में एक भी अंक हासिल नहीं कर पाई हो, लेकिन केवल 300 पंजीकृत महिला क्रिकेटर्स वाले देश से निकलकर वर्ल्ड कप के मुख्य मंच तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी मिसाल है। कप्तान बेबेट डी लीड की अगुवाई में इस युवा टीम ने दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों के खिलाफ खेलकर जो अनुभव हासिल किया है, वह आने वाले सालों में डच क्रिकेट की तस्वीर बदल देगा। मैदान पर मिली इस कड़वी हार से सीख लेकर ‘ऑरेंज आर्मी’ भविष्य में और मजबूत होकर वापसी करने का दम रखती है।
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