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The Hundred 2026: मैनचेस्टर सुपर जायंट्स पहली बार बना Champion

The Hundred 2026

खेल नॉनस्टॉप, न्यू दिल्ली (17 अगस्त)

The Hundred 2026: क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर रविवार रात एक ऐसा मुकाबला खेला गया, जिसकी स्क्रिप्ट किसी थ्रिलर फिल्म जैसी थी। द हंड्रेड 2026 के महामुकाबले में जॉस बटलर की कप्तानी वाली मैनचेस्टर सुपर जायंट्स ने ट्रेंट रॉकेट्स को 5 विकेट से हराकर पहली बार चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया।आरपी-संजीव गोयनका ग्रुप द्वारा इस सीजन में फ्रेंचाइजी का नाम बदलने के बाद, अपने पहले ही सीजन में टीम का चैंपियन बनना किसी सपने के सच होने जैसा है।

इस जीत के सबसे बड़े नायक रहे न्यूजीलैंड के विस्फोटक विकेटकीपर बल्लेबाज टिम सीफर्ट जिन्होंने अपनी तूफानी बल्लेबाजी से ट्रेंट रॉकेट्स के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं। हालांकि, अंत में अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर ने लगातार शानदार गेंदें फेंककर मैच में ऐसा सस्पेंस पैदा किया कि लॉर्ड्स में मौजूद 27 हजार से ज्यादा दर्शकों की सांसें थम गईं, लेकिन अंततः बाजी सुपर जायंट्स के हाथ लगी।

ट्रेंट रॉकेट्स की बल्लेबाजी

मैनचेस्टर सुपर जायंट्स के कप्तान जॉस बटलर ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। ट्रेंट रॉकेट्स की शुरुआत दमदार रही। टीम के ओपनर बेन डकेट (31 रन) और फिन एलन ने मिलकर अच्छी शुरुआत दी, लेकिन इसके बाद अफगानी स्पिनर नूर अहमद का जादू चला। नूर अहमद ने अपने एक ही स्पेल में चार गेंदों के भीतर दोनों सलामी बल्लेबाजों को आउट कर ट्रेंट रॉकेट्स की कमर तोड़ दी। इसके बाद कप्तान सैम बिलिंग्स भी 7 रन बनाकर लियाम डॉसन के एक बेहतरीन थ्रो पर रनआउट हो गए।

95 रन पर 5 विकेट गिर जाने के बाद संकट में फंसी रॉकेट्स की पारी को एन्यूरिन डोनाल्ड और लुईस ग्रेगरी ने संभाला। डोनाल्ड ने महज 19 गेंदों में 38 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली, जिसमें उन्होंने मैदान के हर कोने में शॉट लगाए। दूसरी छोर से ग्रेगरी ने 32 रनों का बहुमूल्य योगदान दिया। इन पारियों और अंत में मिचेल सेंटनर (20 रन) के कैमियो की बदौलत ट्रेंट रॉकेट्स ने निर्धारित 100 गेंदों में 8 विकेट खोकर 158  रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया।

मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की तूफ़ानी पारी

लॉर्ड्स की पिच पर 159 रनों का लक्ष्य आसान नहीं माना जा रहा था, लेकिन मैनचेस्टर सुपर जायंट्स के इरादे कुछ और ही थे। पारी की शुरुआत करने उतरे टिम सीफर्ट ने पहली ही गेंद पर चौका जड़कर अपने इरादे साफ कर दिए। उन्होंने ऑलराउंडर पॉल वॉल्टर (22 रन) के साथ मिलकर शुरुआती गेंदों का पूरा फायदा उठाया और महज 31 गेंदों में 66 रनों की विस्फोटक ओपनिंग पार्टनरशिप कर डाली।

सीफर्ट ने मैदान पर चौके-छक्कों की ऐसी आंधी लाई कि ट्रेंट रॉकेट्स के गेंदबाज असहाय नजर आने लगे। उन्होंने सिर्फ 23 गेंदों में द हंड्रेड फाइनल के इतिहास की सबसे तेज फिफ्टी ठोक दी। आउट होने से पहले सीफर्ट ने 38 गेंदों में 7 छक्के और 4 चौकों की मदद से 72 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली। इस बेमिसाल प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ और ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ दोनों के खिताब से नवाजा गया। कप्तान जॉस बटलर ने भी 14 गेंदों में 23 रन बनाकर रनरेट को बनाए रखा।

टिम सीफर्ट की तूफ़ानी पारी

आखिरी गेंदों का हाई-वोल्टेज ड्रामा

जब लग रहा था कि मैनचेस्टर सुपर जायंट्स बेहद आसानी से मैच जीत जाएगी, तभी ट्रेंट रॉकेट्स के अनुभवी पाकिस्तानी तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर (3/29) ने अपनी घातक गेंदबाजी से पूरे मैच का पासा पलट दिया। आमिर ने पारी की 91वीं से 95वीं गेंद के अपने आखिरी सेट में ऐसी खलबली मचाई जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। उन्होंने अपने इस सेट की आखिरी तीन गेंदों पर बिना कोई रन दिए खतरनाक हेनरिक क्लासेन और माइकल ब्रेसवेल को बैक-टू-बैक आउट कर लॉर्ड्स के मैदान पर तहलका मचा दिया।

इसके बाद अगला और आखिरी सेट डालने आए बेन सैंडरसन ने भी शुरुआती दो गेंदें (96वीं और 97वीं) बिल्कुल डॉट निकाली। आमिर और सैंडरसन की इस कसी हुई गेंदबाजी के चलते मैनचेस्टर के ऊपर लगातार 5 डॉट गेंदों का भारी दबाव बन गया और उनकी धड़कनें बढ़ गईं।

अब मैनचेस्टर को जीत के लिए आखिरी 3 गेंदों में 3 रनों की जरूरत थी और ल्यूस डू प्लूई (27 रन नाबाद) दूसरे छोर पर खड़े थे। मैच किसी भी तरफ झुक सकता था, लेकिन पारी की 98वीं गेंद पर लियाम डॉसन ने कमाल का संयम दिखाया, उन्होंने सैंडरसन की गेंद पर डीप मिडविकेट के ऊपर से एक आकाशीय छक्का जड़कर 2 गेंद शेष रहते मैनचेस्टर सुपर जायंट्स को चैंपियन बना दिया और टीम के खेमे में जश्न की लहर दौड़ गई ।

डबल धमाके से चूकी ट्रेंट रॉकेट्स

इस हार के साथ ही ट्रेंट रॉकेट्स का एक अनोखा इतिहास रचने का सपना टूट गया। दरअसल, इसी मैदान पर कुछ घंटों पहले खेले गए महिला वर्ग के फाइनल में ट्रेंट रॉकेट्स विमेंस ने सनराइजर्स लीड्स को 8 विकेट से हराकर महिला खिताब अपने नाम किया था। अगर पुरुष टीम भी जीत जाती तो यह फ्रेंचाइजी इतिहास में पहली बार एक ही सीजन में दोनों खिताब जीतने का रिकॉर्ड बना लेती, लेकिन जॉस बटलर की सेना ने उनका यह सपना अधूरा छोड़ दिया।

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