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बॉल बॉय से WTC Final तक, KS Bharat के इंटरनेशनल संन्यास की अनकही कहानी

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसी कहानियां बिखरी हुई हैं जो सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बल्कि बेइंतहा सबर, कड़े संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने की क्षमता से लिखी जाती हैं। आंध्र प्रदेश से आने वाले 32 वर्षीय विकेटकीपर बल्लेबाज कोना श्रीकर भरत यानी KS Bharat की दास्तां भी कुछ ऐसी ही है।

4 जून 2026 को जब उन्होंने सोशल मीडिया पर अचानक अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया, तो क्रिकेट जगत चौंक गया। लोग हैरान थे कि महज 32 साल की उम्र में, जब एक खिलाड़ी अपने करियर के चरम पर होता है, तब भरत ने टीम इंडिया की जर्सी को हमेशा के लिए अलविदा क्यों कह दिया? इसके पीछे सिर्फ फॉर्म का गिरना नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के कड़े नियम और विदेशी लीग्स में छुपा एक सुनहरा भविष्य भी है।

बॉल बॉय के रूप में एंट्री और रणजी का ऐतिहासिक तिहरा शतक

विशाखापत्तनम के एक साधारण परिवार में जन्मे  KS Bharat का क्रिकेट मैदान से पहला रिश्ता एक खिलाड़ी के तौर पर नहीं, बल्कि बाउंड्री पार गेंद उठाने वाले ‘बॉल बॉय‘ के रूप में हुआ था। दो दशकों तक उनके पूरे परिवार ने मिलकर सिर्फ एक ही सपना देखा- भारत की नीली और सफेद जर्सी। साल 2012 में आंध्र प्रदेश के लिए घरेलू क्रिकेट की शुरुआत करने के बाद उन्होंने अपनी त्रुटिहीन विकेटकीपिंग और जुझारू बल्लेबाजी से हर किसी का ध्यान खींचा।

KS Bharat के नाम घरेलू क्रिकेट (First-Class Cricket) में एक ऐसा ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज है जिसे भारत का कोई भी बड़ा विकेटकीपर नहीं तोड़ पाया। वह रणजी ट्रॉफी के इतिहास में तिहरा शतक (308 रन) बनाने वाले भारत के पहले विकेटकीपर-बल्लेबाज बने। उन्होंने 116 प्रथम श्रेणी मैचों में 37.90 की शानदार औसत से 6,102 रन बनाए, जिसमें 9 शतक और 27 अर्धशतक शामिल थे। इस बेजोड़ प्रदर्शन के दम पर वे सालों तक इंडिया-ए टीम के नियमित सदस्य रहे और चयनकर्ताओं के दरवाजे खटखटाते रहे।

Ks Bharat पहले क्रिकेटर नहीं बल्कि बॉल बॉय के रूप में काम करते थे । (Photo: Internet)

महेंद्र सिंह धोनी का युग और ऋषभ पंत का खौफनाक साया

भारतीय क्रिकेट में पिछले दो दशकों से विकेटकीपर बनना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा है। शुरुआत में महेंद्र सिंह धोनी की महानता के कारण रिद्धिमान साहा और दिनेश कार्तिक जैसे दिग्गजों को पर्याप्त मौके नहीं मिले। धोनी के बाद जब ऋषभ पंत का आगमन हुआ, तो उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से टेस्ट क्रिकेट की परिभाषा ही बदल दी। ऐसे दौर में KS Bharat जैसे विशुद्ध और पारंपरिक विकेटकीपर के लिए नेशनल टीम के प्लेइंग इलेवन में जगह बनाना लगभग असंभव सा काम था।

KS Bharat को सालों तक बेंच पर बैठकर सिर्फ अपने मौके का इंतजार करना पड़ा। वह टीम के साथ यात्रा करते थे, नेट्स पर पसीना बहाते थे, लेकिन मुख्य मैच में उन्हें केवल ड्रिंक्स ले जाते हुए देखा जाता था। इसके बावजूद उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी और अपनी तैयारी में कोई कसर बाकी नहीं रखी।

बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी और WTC फाइनल: जब सच हुआ दो दशकों का सपना

नियति ने KS Bharat के लिए एक अलग ही स्क्रिप्ट लिखी थी। दिसंबर 2022 में ऋषभ पंत एक भयानक कार दुर्घटना का शिकार हो गए और लंबे समय के लिए क्रिकेट से दूर हो गए। इसके बाद टीम इंडिया को एक भरोसेमंद विकेटकीपर की सख्त जरूरत थी जो स्पिनरों के अनुकूल भारतीय पिचों पर रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की फिरकी को संभाल सके।

फरवरी 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नागपुर टेस्ट में KS Bharat को आखिरकार अपनी प्रतिष्ठित टेस्ट कैप (Cap No. 311) मिली। यह उनके और उनके परिवार के 20 साल के संघर्ष का प्रतिफल था। इसके ठीक बाद जून 2023 में इंग्लैंड के द ओवल मैदान पर खेले गए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के फाइनल में भी उन्हें भारत के मुख्य विकेटकीपर के रूप में चुना गया। हालांकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में भारत को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन भरत ने दुनिया के सबसे बड़े मंच पर अपनी दस्तानों की कलाकारी का लोहा मनवाया।

बल्लेबाजी का दबाव और विशाखापत्तनम में आखिरी टेस्ट

KS Bharat की विकेटकीपिंग हमेशा से ही विश्व स्तरीय रही, लेकिन आधुनिक टेस्ट क्रिकेट की मांग बदल चुकी थी। आज के दौर में विकेटकीपर से केवल कैच पकड़ने की नहीं, बल्कि निचले क्रम में आकर मैच जिताऊ पारियां खेलने की उम्मीद की जाती है। भरत ने भारत के लिए खेले 7 टेस्ट मैचों की 12 पारियों में 20.09 की औसत से केवल 221 रन बनाए, जिसमें उनका उच्चतम स्कोर 44 रन रहा।

बल्ले से लगातार नाकाम रहने के कारण उन पर दबाव बढ़ता गया। ध्रुव जुरेल और केएल राहुल जैसे खिलाड़ियों के विकल्प सामने आने के बाद भरत के लिए रास्ते बंद होने लगे। फरवरी 2024 में अपने घरेलू मैदान विशाखापत्तनम में इंग्लैंड के खिलाफ खेला गया टेस्ट मैच उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मैच साबित हुआ। इसके बाद उन्हें टीम से ड्रॉप कर दिया गया और वह दोबारा वापसी नहीं कर पाए।

विराट, रोहित और राहुल द्रविड़ को विदाई पोस्ट में खास सलाम

अपने संन्यास के आधिकारिक बयान में KS Bharat बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने लिखा, “गर्व से भरे दिल और गहरी कृतज्ञता के साथ, मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अपने संन्यास की घोषणा करता हूं। देश के लिए खेलना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है।” इसके साथ ही उन्होंने भारतीय क्रिकेट के तीन बड़े स्तंभों को विशेष रूप से धन्यवाद दिया:

विराट कोहली: KS Bharat ने लिखा कि आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर (RCB) के उनके पहले कप्तान विराट कोहली का वह दिल से शुक्रिया अदा करते हैं, जिन्होंने उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया और पहचान दिलाई।

रोहित शर्मा: उन्होंने कप्तान रोहित शर्मा का आभार जताया, जिनकी कप्तानी में उन्हें टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने का अमूल्य अवसर मिला था।

राहुल द्रविड़: इंडिया-ए से लेकर नेशनल टीम तक मार्गदर्शन देने के लिए उन्होंने पूर्व कोच राहुल द्रविड़ को गुरु के रूप में याद किया।

इसके अलावा उन्होंने बीसीसीआई (BCCI), आंध्र क्रिकेट एसोसिएशन, अपने माता-पिता, बहन और मैदानकर्मियों (Groundsmen) का भी शुक्रिया अदा किया।

संन्यास के पीछे की असली वजह: बीसीसीआई का सख्त नियम और विदेशी लीग्स

KS Bharat के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा रणनीतिक कारण बीसीसीआई का ‘कूलिंग-ऑफ’ और विदेशी लीग का नियम है। बीसीसीआई के सख्त नियमों के मुताबिक, कोई भी सक्रिय भारतीय खिलाड़ी बोर्ड से नाता तोड़े बिना दुनिया की अन्य आकर्षक टी20 लीग्स (जैसे बिग बैश, आईएलटी20, मेजर लीग क्रिकेट या सीपीएल) में नहीं खेल सकता। हाल ही में विजय शंकर जैसे खिलाड़ियों ने भी इसी वजह से भारतीय क्रिकेट से दूरी बनाई है।

32 साल की उम्र में भरत को बखूबी अहसास हो चुका था कि ऋषभ पंत की वापसी, संजू सैमसन की फॉर्म और ध्रुव जुरेल व ईशान किशन जैसे युवाओं की मौजूदगी में अब टीम इंडिया में उनकी वापसी मुमकिन नहीं है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहकर ग्लोबल टी20 सर्किट में एक फ्रीलांसर खिलाड़ी के रूप में उतरना उनके करियर और वित्तीय सुरक्षा के लिहाज से एक बेहद व्यावहारिक फैसला है।

KS Bharat ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास का घोषणा कर लिया है। (Photo: Internet)

रिकॉर्ड्स से परे एक प्रेरणादायक सफर

KS Bharat का अंतरराष्ट्रीय करियर भले ही सिर्फ 7 टेस्ट मैचों तक सीमित रहा हो, लेकिन उनकी विरासत केवल इन आंकड़ों से नहीं नापी जा सकती। वह इस बात की जीती-जागती मिसाल हैं कि अगर आपमें हुनर और लगन है, तो आप एक बॉल बॉय से विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय कर सकते हैं। भारतीय क्रिकेट फैंस के दिलों में उनके बेहतरीन ग्लव-वर्क और शांत स्वभाव की यादें हमेशा ताजा रहेंगी। इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद, उम्मीद है कि वह ग्लोबल लीग्स में अपनी बल्लेबाजी का एक नया रूप दुनिया को दिखाएंगे।

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