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349 रन भी कम पड़े,DLS के चक्रव्यूह में कैसे फंसी इंडिया A?

क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, लेकिन कुछ मुकाबले ऐसे होते हैं जो इतिहास के पन्नों में अपनी अजीबोगरीब परिस्थितियों के लिए दर्ज हो जाते हैं। श्रीलंका के डाम्बुला मैदान पर चल रही त्रिकोणीय श्रृंखला में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। भारत ‘A’ ने स्कोरबोर्ड पर 349 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया। आम तौर पर सीमित ओवरों के क्रिकेट में इस स्कोर को बेहद सुरक्षित माना जाता है। इसके बावजूद, अफगानिस्तान ‘A’ ने इस मुकाबले को डकवर्थ-लुईस-स्टर्न (DLS) नियम के तहत 4 रनों से जीत लिया।

हर क्रिकेट प्रेमी के मन में यही सवाल उठ रहा है कि आखिर 350 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम 26वें ओवर में सिर्फ 177 रन बनाकर मैच कैसे जीत गई? आइए इस मैच के पीछे की असली टैक्टिक्स, DLS नियम के पेचीदा गणित और भारतीय टीम से हुई उन रणनीतिक चूकों को विस्तार से समझते हैं।

पहली पारी का रोमांच: जब भारतीय बल्लेबाजों ने मचाया कोहराम

मैच की शुरुआत भारत के पक्ष में रही और टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय ‘A’ टीम की शुरुआत बेहद आक्रामक रही। पिच बल्लेबाजी के लिए पूरी तरह अनुकूल थी और भारतीय बल्लेबाजों ने इसका भरपूर फायदा उठाया। शीर्ष क्रम के जल्दी आउट होने के बाद मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने भारतीय पारी को संभाला। कप्तान तिलक वर्मा और उप-कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने मिलकर टीम को संभाला और अफगानी गेंदबाजों के खिलाफ मैदान के हर कोने में बेहतरीन शॉट लगाए। इन दोनों के बीच हुई शतकीय साझेदारी ने ही भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

इसी पारी के दौरान 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने महज 22 गेंदों में 44 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर अफगानिस्तान के गेंदबाजी आक्रमण को बैकफुट पर धकेल दिया। उनकी टाइमिंग इतनी सटीक थी कि उन्होंने बिना कोई हवाई शॉट यानी बिना एक भी छक्का खेले सिर्फ चौकों की मदद से 200 का स्ट्राइक रेट बनाए रखा। इन शानदार पारियों की बदौलत भारत ने निर्धारित 49 ओवरों में 9 विकेट खोकर 349 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। उस समय ड्रेसिंग रूम में भारतीय खेमा बेहद आश्वस्त था, क्योंकि किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह स्कोर भी कम पड़ जाएगा।

वैभव सूर्यभांशी का तूफानी पारी 22 गेंद पर 44 रन (Photo: Internet)

मौसम का दखल और बदला हुआ समीकरण (294 का नया लक्ष्य)

जब भारतीय टीम अपनी पारी समाप्त कर पवेलियन लौटी, तभी डाम्बुला के आसमान को काले बादलों ने घेर लिया। मूसलाधार बारिश के कारण खेल काफी समय तक रुका रहा, जिससे काफी ओवरों का नुकसान हो चुका था। अंपायरों ने खेल को दोबारा शुरू करने के लिए ओवरों की संख्या घटाकर 38 ओवर कर दी। जब ओवर कम होते हैं, तो पीछा करने वाली टीम के लिए DLS नियम के तहत रनों के लक्ष्य को भी संशोधित किया जाता है। भारत के 349 रनों के विशाल स्कोर को देखते हुए, अफगानिस्तान ‘A’ को 38 ओवरों में 294 रनों का नया लक्ष्य मिला। यहाँ से असली रणनीतिक खेल शुरू हुआ, जहाँ अफगानिस्तान ने भारतीय टीम को मात दी।

डकवर्थ-लुईस (DLS) का गणित:

DLS नियम पूरी तरह से दो मुख्य कारकों पर काम करता है, जिसमें बचे हुए ओवर और हाथ में बचे हुए विकेट शामिल हैं। क्रिकेट की भाषा में इसे ‘रिसॉर्स’ कहा जाता है। यदि आपके विकेट नहीं गिरे हैं, तो आपका रिसॉर्स प्रतिशत बहुत ऊंचा रहता है, जिससे आपका पार स्कोर काफी कम हो जाता है। अफगानिस्तान के ओपनर्स, कप्तान इमरान मीर और बाहिर शाह, इस गणित को अच्छी तरह समझकर मैदान पर उतरे थे। उन्हें पता था कि श्रीलंका का मौसम पल-पल बदल रहा है और बारिश दोबारा आ सकती है।

इसी वजह से उन्होंने जोखिम मुक्त आक्रामकता की एक बेहद चालाक रणनीति अपनाई। उन्होंने बड़े छक्के मारने के बजाय ग्राउंडेड शॉट्स खेले और गैप्स का इस्तेमाल किया, जिससे रन गति भी बनी रही और विकेट गिरने का खतरा भी कम हो गया। अफगानिस्तान ने 25.5 ओवरों के खेल तक सिर्फ 2 विकेट खोए और स्कोरबोर्ड पर 177 रन टांग दिए। कप्तान इमरान मीर 75 और बाहिर शाह 51 रन बनाकर क्रीज पर मजबूती से डटे हुए थे।

विशाल स्कोर के बाद भी टीम इंडिया को करना पड़ा हार का सामना (Photo: Internet)

टर्निंग पॉइंट: जब दोबारा आई बारिश

26वें ओवर की पांचवीं गेंद फेंकी जा चुकी थी कि अचानक दोबारा तेज बारिश शुरू हो गई। इस बार बारिश इतनी तेज थी कि मैच दोबारा शुरू होना नामुमकिन लग रहा था। अंपायरों ने तुरंत DLS पार स्कोर की गणना की तो पाया कि 25.5 ओवर की समाप्ति पर, सिर्फ 2 विकेट खोने के बाद अफगानिस्तान का DLS पार स्कोर 173 रन होना चाहिए था। लेकिन अफगानिस्तान की टीम पहले ही 177 रन बना चुकी थी। क्योंकि अफगानिस्तान तकनीकी रूप से पार स्कोर से 4 रन आगे था, इसलिए अंपायरों ने मैच रद्द होने की स्थिति में अफगानिस्तान ‘A’ को 4 रन से विजेता घोषित कर दिया।

भारतीय टीम से कहाँ हुई चूक?

इस हार के बाद भारतीय टीम की रणनीतियों पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं और कप्तान तिलक वर्मा ने भी मैच के बाद माना कि टीम से कुछ बड़ी गलतियां हुईं। सबसे बड़ी कमजोरी यह रही कि भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआती ओवरों में बहुत अधिक वाइड और नो-बॉल फेंकी, जिससे एक्स्ट्रा रनों ने अफगानिस्तान पर से दबाव पूरी तरह हटा दिया।

इसके अलावा, जब आपको पता हो कि बारिश आने वाली है, तो गेंदबाजी टीम का एकमात्र लक्ष्य विकेट चटकाना होना चाहिए, लेकिन भारतीय स्पिनर्स और तेज गेंदबाज मिडिल ओवरों में साझेदारी तोड़ने में पूरी तरह नाकाम रहे। अगर भारत उस समय सिर्फ एक विकेट और ले लेता, तो पार स्कोर का आंकड़ा तुरंत 177 से ऊपर चला जाता और भारत यह मैच आसानी से जीत जाता।

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