खेल नॉनस्टॉप, नई दिल्ली: क्रिकेट में कभी-कभी एक खराब सीजन खिलाड़ी के सामने ऐसे सवाल खड़े कर देता है, जिनका जवाब उसे मैदान पर ही देना पड़ता है। महाराष्ट्र के बल्लेबाज Ankeet Bawane के लिए पिछला रणजी ट्रॉफी सीजन कुछ ऐसा ही रहा। जिस खिलाड़ी ने वर्षों तक घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाए, वह 2025-26 के पूरे रणजी सीजन में सिर्फ 72 रन बना सका। लेकिन नए सीजन में उसकी बल्लेबाजी का अंदाज बदला हुआ नजर आ रहा है। शुरुआती तीन पारियों में 335 रन बनाकर बावने ने दिखाया है कि वह अभी भी बड़ी पारियां खेलने का दम रखते हैं।
33 साल के इस बल्लेबाज की कहानी सिर्फ दो शतकों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे खराब फॉर्म से निकलने की कोशिश, चोट से जूझना और भारतीय टीम की जर्सी पहनने का सपना भी है।
72 रन से 335 तक का सफर
पिछले रणजी सीजन में बावने सात मैचों में सिर्फ 72 रन बना पाए थे। उनका औसत 10.28 रहा। घरेलू क्रिकेट में लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन करने वाले बल्लेबाज के लिए यह सीजन निराशाजनक था। नए सीजन से पहले उन्हें टेनिस एल्बो की परेशानी भी हुई, जिसने उनकी तैयारी को और चुनौतीपूर्ण बना दिया।
लेकिन बावने ने खराब प्रदर्शन को पीछे छोड़ने के लिए अभ्यास पर ध्यान दिया। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि इस सीजन की तैयारी के दौरान उन्होंने अभ्यास में लगभग 20,000 गेंदों का सामना किया। उनका मकसद अपनी बल्लेबाजी की तकनीक में सुधार करना और पिछले सीजन की गलतियों को दोहराने से बचना था।
इस मेहनत का असर मैदान पर भी दिखाई दिया। 2026-27 रणजी ट्रॉफी सीजन की शुरुआती तीन पारियों में बावने ने 335 रन बनाए और उनका औसत 167.50 रहा। इन पारियों में उनके बल्ले से दो शतक निकले। पिछले सीजन के आंकड़ों से तुलना करें, तो यह शुरुआत उनके लिए कितनी अहम है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
रणजी ट्रॉफी में महाराष्ट्र के बल्लेबाज अनकीत बावने।दो शतक, लेकिन सबसे खास बात कुछ और
नए सीजन में बावने ने सर्विसेज के खिलाफ नाबाद 105 रन बनाकर शुरुआत की। इसके बाद झारखंड के खिलाफ उन्होंने 358 गेंदों पर नाबाद 169 रन की पारी खेली। इस दौरान उन्होंने 13 चौके लगाए। उनकी 169 रन की पारी में सिर्फ रन बनाना ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहने का धैर्य भी नजर आया।
आज के क्रिकेट में बड़े स्कोर के साथ बल्लेबाजी की गति पर भी चर्चा होती है, लेकिन रणजी ट्रॉफी जैसे लंबे प्रारूप में विकेट बचाकर खेलना और पारी को आगे बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। बावने की इन पारियों में यही बात देखने को मिली। उन्होंने गेंदबाजों को लंबे समय तक मेहनत करने पर मजबूर किया और अपनी टीम के लिए बड़े रन जुटाए।
हालांकि, शुरुआती तीन पारियों के आंकड़ों को पूरे सीजन की सफलता नहीं माना जा सकता। असली चुनौती इस प्रदर्शन को आगे भी जारी रखने की होगी। घरेलू क्रिकेट में एक अच्छी शुरुआत के बाद लगातार रन बनाना ही किसी खिलाड़ी की दावेदारी को मजबूत करता है।
19 साल के घरेलू करियर के बाद भी भारत का सपना
बावने ने 2007 में केवल 15 साल की उम्र में घरेलू क्रिकेट में कदम रखा था। तब से वह महाराष्ट्र की बल्लेबाजी का अहम हिस्सा बने हुए हैं। BCCI की रिपोर्ट के मुताबिक, वह 132 प्रथम श्रेणी मैचों में 8,500 से ज्यादा रन बना चुके हैं और उनके नाम 26 शतक हैं। महाराष्ट्र के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनसे ज्यादा शतक किसी बल्लेबाज ने नहीं लगाए हैं।
इतना लंबा घरेलू करियर होने के बावजूद भारतीय टीम के लिए खेलना उनका सपना बना हुआ है। BCCI से बातचीत में बावने ने कहा कि हर सीजन वह 1,000 रन बनाने, महाराष्ट्र को खिताब जिताने और भारतीय टीम में जगह पाने के लक्ष्य के साथ उतरते हैं। उनकी मौजूदा शुरुआत निश्चित रूप से उत्साह बढ़ाने वाली है, लेकिन भारतीय टीम में चयन की कोई गारंटी नहीं है। इसके लिए उन्हें पूरे सीजन में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा और चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचना होगा।
फिलहाल बावने के सामने सबसे जरूरी काम इसी लय को बनाए रखना है। पिछले सीजन के 72 रन और नए सीजन की शुरुआती तीन पारियों के 335 रन के बीच का अंतर बताता है कि उन्होंने वापसी के लिए कितनी मेहनत की है। अब देखना होगा कि वह इस शुरुआत को कितनी दूर तक ले जा पाते हैं।
---------------------- समाप्त ---------------------
यह भी पढ़े: 4 साल बाद लौटे Bhuvneshwar Kumar, न्यूजीलैंड दौरे पर फिर दिखेगा ‘भुवी’ का स्विंग



The conversation